Wednesday, April 1, 2009

रेकी भारत की देन हैं ।



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Tuesday, February 17, 2009

रेकी स्पर्श तरंग -- कुछ चित्र

पहली जनवरी २००९ को विश्व शान्ति के लिये ग्रुप रेकी करता डॉ मंजुलता सिंह का रेकी ग्रुप




आर अच् एफ का विशेष समान लेते हुए डॉ मंजुलता सिंह

Sunday, March 16, 2008

रेकी स्पर्श तरंग { वैकल्पिक चिकित्सा } हिंदी मे प्रकाशित हुई है


रेकी स्पर्श तरंग { वैकल्पिक चिकित्सा } पुस्तक बहुत ही सरल हिंदी मे है । पुस्तक की कीमत मात्र २०० रुपये है । आप को ये पुस्तक भारत वर्ष मे २५० रुपये मे कुरियर द्वारा अग्रिम राशि भेजने पर मिल सकती है । भारत से बाहर भी ये पुस्तक भेजी जा सकती है । और जानकारी के लिये ईमेल से सम्पर्क करे ।

Saturday, December 22, 2007

रेकी बीमारी के कारण को जड़ मूल से नष्ट करती हैं

चिन्ता , क्रोध , आतम , आतम , लोभ , उत्जेना , और तनाव हमारे शरीर के अंगों एवम नाड़ियो मे हलचल पैदा करते देते हैं , जिससे हमारी रक्त धमनियों मे के प्रकार के विकार हो जाते हैं । शारीरिक रोग इन्ही विकृतियों के परिणाम हैं । शारीरिक रोग मानसिक रोगों से प्रभावित होते है । अत्याधिक चिंता , निराशा , आत्म ग्लानी , उदासीनता , जरुरत से ज्यादा खुश दिखना , बहुत बोलना या एक दम चुप रहना , संदेह करना , आत्महत्या के प्रयास बीमारी के लक्षण है । बीमारी एक दिन मे अचानक नहीं आती हैं । हम पहले कि वर्ष तक अपने अंदर अपनी गलत आदतों से , आहार - विहार की भूलो से बीमारी को तयार करते रहते है । तब बीमारी चिह्नों { symptoms} के रूप मे प्रकट हो कर हमे बताती है कि शरीर मे बैचेनी { dis - ease } हैं । जन्म जात बीमारी को छोड़ कर रेकी के द्वारा सभी बीमारियों का इलाज संभव हैं । रेकी बीमारी के कारण को जड़ मूल से नष्ट करती हैं , स्वास्थ्य स्तर को उठाती है , बीमारी के लक्षणों को दबाती नहीं हैं । रेकी के द्वारा मानसिक भावनायो का संतुलन होता है और शारीरिक तनाव , बैचेनी व दर्द से छुटकारा मिलता जाता हैं ।
रेकी गठिया , दमा , कैंसर , रक्तचाप , फालिज , अल्सर , एसिडिटी , पथरी , बावासीर , मधुमेह , अनिद्रा , मोटापा , गुर्दे के रोग , आंखो के रोग , स्त्री रोग , बाँझपन , शक्तिन्युनता , पागलपन तक दूर करने मे समर्थ है । यदि बीमारी का इलाज शुरू मे ही कर लिया जाये तो रेकी शीघ्र रोग मुक्त कर देती हैं । ये मेरा व्यकिगत अनुभव है कि कई स्थानों से चिकित्सा से निराश रोगी ही रेकी उपचारक के पास आते हैं इसलिये रोगी को रेकी से तुरंत लाभ नहीं होता है और रोग ठीक होने मे ज्यादा समय लेता हैं ।

Monday, October 1, 2007

रेकी

Tuesday, September 25, 2007

अच्छा रेकी चैनल

अच्छा रेकी चैनल बनने कै लिये इच्छा सभी के मन मे होती है । हीलर बनने के लिया मानसिक शांति तथा जीवनदायिनी शक्ति की आवश्यकता होती है । हीलिंग का अर्थ है रोग मुक्ति तथा हीलर का अर्थ है वह व्यक्ति जो आलोकिक शक्ति द्वारा रोग ठीक कराने की शमता रखता हो । हीलर बीमार व्यक्ति का उपचार हाथो की ऊर्जा से करता है। स्पर्श तरंगे रोगी को स्वस्थ करती है । अच्छे चैनल मे श्रद्धा , विश्वास , आत्मीयता , सहनशक्ति तथा अभ्यास जैसे गुणो की आवश्यकता होती है तभी वह सफल उपचारक बन सकता है ।

Thursday, September 20, 2007

रेकी शक्तिपात

रेकी शक्तिपात को रेकी सुसंगता , दीक्षा , अभिषेक या Attunement भी कहते है । रेकी आचार्य अर्थात रेकी ग्रैंड मास्टर के सिद्ध हाथो के द्वारा दीं जाने शक्तिशाली ऊर्जा शक्तिपात कही जाती हैं । रेकी शक्तिपात हर कोर्स मे किया जता है । शक्तिपात के बाद विद्यार्थी सर्व व्यापी प्राणशक्ति के स्रोत से जुड़ जाता हैं । यह एक दैवीय शक्ति है जो चैनल के हाथो मे जीवन भर रहती है । शक्तिपात के द्वारा रेकी गुरू विद्यार्थी को ब्रह्मांडीय ऊर्जा शक्ति से जोड़ देता है और उसके जीवन का रूपांतरण हों जाता है। जो व्यक्ति जितना संवेदनशील होता है उतनी ही जल्दी वह दैवीय शक्ति से जुड़ जाता है । रेकी शक्तिपात दूरस्थ { distant Attunement } भी किया जाता है .

Monday, September 17, 2007

रेकी -- प्रत्येक कोर्स के बीच " कितना अंतर " आवश्यक है ?

प्रत्येक कोर्स के बीच " कितना अंतर " आवश्यक है ? यह अत्यंत समझदारी की बात है । डाक्टर ऊसुई नए हर कोर्स कै बीच २१ दिन का अन्तेर उचित माना है। कुछ रेकी ग्रैंड मास्टर इस नियम को नहीं मानते और वह अपनी सुविधा से अंतराल तय कर लेते हैं । जल्दी जल्दी कोर्स समाप्त करने से विद्यार्थी शारीरिक एवम मानसिक रूप से थक जाता है और एडवांस कोर्स की तरंगो को पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं कर पाता । मेरा अनुभव है कि प्रत्येक कोर्स के बीच तीन दिन अभ्यास के लिये अवश्य देना चाहिये और "मास्टरशिप " करने से पहले रेकी उपचार के अनुभव भी होना चाहिये । अपना तथा दूसरो का उपचार करने पेर अधिक स्पर्श उर्जा का अनुभव होने लगता है और रेकी - उपचार के प्रति विश्वास भी बढ़ जाता है ।

Tuesday, September 11, 2007

रेकी ग्रैंड मास्टरशिप

रेकी मास्टर बनाने की क्षमता प्रदान करने वाले आचार्य को रेकी ग्रैंड मास्टर कहा जाता है। रेकी ग्रैंड मास्टरशिप रेकी का उच्चतम कोर्स है । सैकड़ो - हजारो विद्यार्थी रेकी सीखते हैं परन्तु " रेकी ग्रैंड मास्टरशिप " की ऊचाई तक वे ही पहुचते है जो रेकी के अभ्यास , प्रचार एवम प्रसार मे पूरे उत्साह से लगाए रहते हैं । इस कोर्स मे शक्ति एवम उर्जा बढ़ाने वाले अनेक सिम्बल सिखाये जाते है । आज्ञा चक्र को खोलने वाला तथा विद्य , वैभव , प्रसन्नता, विजय , अभिव्यक्ति , पूर्णता , प्रेम , व ध्यान को बढ़ाने वाले अनके सिम्बल सिखाये जाते हैं । रेकी उर्जा को जल मे स्थापित करना { sui ching } सिखाया जाता हैं . शक्ति चक्र कि ग्रीक तथा अमेरिकन पद्धति सिखायी जाती हैं । त्राटक क्रिया द्वारा नेत्रो की चुम्बकीये शक्ति का विकास किया जाता हैं । मास्टर ग्रिड बनाना , सामुहिक उपचार करना , विद्या शक्तिपात तथा स्मृति शक्तिपात भी सिखाया जाता हैं । यह एक आध्यात्मिक साधना हैं जिसमे शांन्ति संतुलन एवम धेर्य्र का विकास होता है ओर रेकी ग्रैंड मास्टर बन कर प्राणिमात्र के प्रति कर्तव्य बोध अधिक बढ जाता है ।

रेकी तृतीय डिग्री { बी } कोर्स

रेकी तृतीय डिग्री { बी } कोर्स , रेकी मास्टर कोर्स कहलाता हैं । जिसे अनुभवी , साह्रदय , गुरू { रेकी ग्रैंड मास्टर } ही सिखा सकता है। अपने पुरवाग्रहो को छोड़ कर जो भी रेकी चैनल समर्पण , श्रद्धा , और विश्वास के साथ गुरू के पास जाता है वह " रेकी मास्टर " बन सकता है । शरीर एवम मन की शक्तियों को एकाग्र कर शक्तिपात { Attunement } के रहस्य समझाये जाते हैं । परम्परागत , आधुनिक , तिब्बेतन , भारतीय , डाक्टर उसुई तथा विश्व की प्रमुख रेकी संस्थाओ द्वारा मान्य शक्तिपात की विधियाँ सिखाई जाती है । मुलबंध का ज्ञान , अन्तः करण सिम्बल , रेकी उपचार शक्तिपात , दूरस्थ शक्तिपात, रेकी के सफल संचालन का ज्ञान दिया जाता है । रेकी मास्टर बन कर नाम , प्रतिष्ठा , धन , सुख , और स्वास्थ्य तथा शांति पायी जा सकती हैं ।

Sunday, September 9, 2007

रेकी तृतीय डिग्री { ए } कोर्स

रेकी तृतीय डिग्री { ए } कोर्स रेकी मास्टर उपचारक कोर्स है । इस कोर्स मे बहुत विस्तार से साइकिक सर्जरी सिखाई जाती है । रेकी साइकिक सर्जरी , लेज़र साइकिक सर्जरी तथा औरा साइकिक सर्जरी इसके प्रमुख भाग हैं । इस कोर्स मे स्फटिक उपचार विज्ञान की विस्तार से चर्चा की जाती है । स्फटिक { क्रिस्टल } की सही पहचान व उसके उपयोग सिखाये जाते हैं । इस कोर्स मे उद्देश्य प्राप्ति ध्यान , सिम्बल ध्यान , चक्र ध्यान , डाक्टर उसुई सिम्बल , आज्ञाचक्र , नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के उपाय सिखाये जाते है । यह बहुत ही प्रभावशाली कोर्स है । इस के द्वारा मानसिक एवम आद्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है । इसे सीख कर हर रोग एवम व्याधि का उपचार किया जा सकता है ।

Friday, September 7, 2007

रेकी द्वितीय डिग्री कोर्स

द्वितीय डिग्री कोर्स के शक्तिपात से { Attunement } रेकी तरंगो का प्रभाव व्यक्ति के चक्रो पर अधिक प्रभावशाली ढंग से पड़ता है । इस कोर्स मे रेकी के तीन सिम्बल { प्रतीक } सिखाये जाते हैं । इस कोर्स मे परामानासिक शक्तियों का परिचय दिया जाता हैं । यन्त्र , तंत्र , मन्त्र , पिरामिड यन्त्र , कुंडलिनी , पेंडुलम के लाभ बताये जाते हैं । रेकी शक्ति सिम्बल { Power symbol } के दारा सजीव या निर्जीव शक्ति बढ़ जाती है । गलत व्यक्ति , वस्तु या वातावरण की नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा बताई जाती हैं । मानसिक या भावनात्मक सिम्बल { mental and emotional symbol } से गलत आदतो से छुटकारा तथा एकाग्रता , स्मरणशक्ति , पारिवारिक संबंधो को सुधारने की कला सिखायी जाती है । खोई वस्तुए भी इस सिम्बल के ध्यान से मिल जाती हैं । दूर उपचारक सिम्बल { distant symbol } रेकी मे बहुत प्रभावशाली है । इसका उपयोग शक्ति , सुरक्षा , उपचार , शक्तिपात , भविष्य मे उन्नति तथा मनोकामना पूर्ति के लिये होता है ।
द्वितीय डिग्री कोर्स मे मस्तिशिक की मूलभूत तरंगो का परिचय तथा अल्फ़ा लेबल के उपयोग ओर ध्यान की विधियां बताई जाती हैं ।
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Wednesday, September 5, 2007

रेकी प्रथम डिग्री कोर्स

रेकी प्रथम डिग्री कोर्स - यह रेकी के सिद्वांत , इतिहास व लाभ , शक्तिपात द्वारा प्राणउर्जा का जागरण , शिथिलीकरण , अल्फ़ा लेबल , आभामण्ल { aura } , विविध रोगो के उपचार का ज्ञान , चक्र विज्ञान , मानसिक रेचक ध्यान , स्फटिक विज्ञान का परिचय , आहार एवम स्वास्थ्य का पूर्ण ज्ञान , जीवन के सही रूप से रूपांतरित करने वाले डाक्टर ऊसुई के सिद्धांत सिखाये जाते हैं ।
बेसिक कोर्स कर लेने पर व्यक्ति स्वयम का तथा दूसरो का उपचार करना सीख लेता हैं । बेसिक कोर्स सीखकर धरती कि सभी सजीव , निर्जीव , वस्तुये , पेड़ , पोधे , पशु , पेयजल , आहार आदि को स्वस्थ , संतुलित तथा ऊर्जावान बना सकता है ।

Tuesday, September 4, 2007

रेकी परिचय ३

' रे ' अर्थात सार्वभोमिक { युनिवर्सल } एवम ' की ' अर्थात प्राणशक्ति { लाइफ फोर्स एनेर्जी } वह जीवन शक्ति जो इश्वर प्रदत हे और हर जीवात्मा मे व्याप्त है । यह शक्ति हमारे हाथो मे होती है और इस शक्ति का जागरण किसी योग्य { रेकी ग्रैंड मास्टर } गुरू के शक्तिपात { initiation } द्वारा ही संभव होता है । तिब्बत एवम भारत मे इस शक्ति को पुनर्जीवित कराने वाले जापान के साधक डाक्टर मिकाओ ऊसुई माने जाते है । ऊसुई के योग्य शिष्य डाक्टर छुज़ीरो हयाशी ने इस विद्या को डिग्रीयों मे अर्थात कोर्स का विभाजन कर के इसे सीखना अधिक सुविधाजनक बना दिया हे । डाक्टर छुज़ीरो हयाशी की शिष्या मैडम हवायो टकाटा रेकी मे प्रथम महिला हें । जापान से बाहर रेकी को पंहुचा कर मैडम हवायो टकाटा ने मानवता का कल्याण किया है ।

Monday, September 3, 2007

रेकी परिचय २

रेकी वैज्ञानिक , प्रमाणिक , सरलतम , अचूक प्राण उपचार पध्दति है । केवल हाथो के स्पर्श से स्वयम के तथा दूसरो के शारीरिक तथा मानसिक रोगो का सफल उपचार किया जाता है । प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर इश्वर प्रदत अदभुत शक्ति छिपी होती है जिसका उपयोग रेकी - उपचार मे किया जाता है । संसार की किसी भी प्राणवान वस्तु , व्यक्ति , पेड़ , पोधे , जीव जंतु को स्पर्श { नजदीक या दूर } के द्वारा रोग मुक्त किया जाता है । रोग , दवाये , डाक्टर की फ़ीस से मुक्त , घर - घर मे हर व्यक्ति चिकित्सक बनकर आत्मनिर्भर हो सकता है और अपने परिवार मे सुख - शांति तथा स्वास्थ्य ला सकता है । बच्चे , बड़े - बूढ़े , शिक्षित , अशिक्षित कोई भी रेकी - विद्या को सीख सकता है ।

Sunday, September 2, 2007

रेकी परिचय १

रेकी शुद्ध प्राणशक्ति है । भगवान् बुद्ध एवम ईसा मसीह इस शक्ति का प्रयोग कर किसी व्यक्ति को निरोग कर देते थे परन्तु कालांतर मे ये पद्धति लुप्त हो गयी ।
" रे " से तात्पर्य आत्मा , प्रकाश , किरण या ब्रह्माण्ड की ऊर्जा है ।
" की " से तात्पर्य चीनी भाषा मे " ची " है । ईसाइयों के लिये यह ईसा का प्रकाश है । हिन्दुओ के लिये " प्राण " है । हवाई लोगो के लिये " मन " है । वीहेल्म मे " शारीरिक ऊर्जा " है । अंग्रेजी मे जीवन की श्वास या जैवीय ऊर्जा है ।
रेकी का सार है - स्वर्ग , पृथ्वी तथा मानवता का संतुलित रूप जिसकी खोज डाक्टर मिकाओ ऊसुई ने अथक परिश्रम तथा साधना द्वारा की है और जिसे उसुई शिकी रिहो [ USUI SHIKI RYOHO ] अर्थात प्राकृतिक उपचार की उसुई प्रणाली के नाम से जाना जाता है ।

Sunday, August 19, 2007






Monday, August 13, 2007

अच्छा रेकी चैनल

अच्छा रेकी चैनल बनने कै लिये इच्छा सभी के मन मे होती है । हीलर बनने के लिया मानसिक शांति तथा जीवनदायिनी शक्ति की आवश्यकता होती है । हीलिंग का अर्थ है रोग मुक्ति तथा हीलर का अर्थ है वह व्यक्ति जो आलोकिक शक्ति द्वारा रोग ठीक कराने की शमता रखता हो । हीलर बीमार व्यक्ति का उपचार हाथो की ऊर्जा से करता है। स्पर्श तरंगे रोगी को स्वस्थ करती है । अच्छे चैनल मे श्रद्धा , विश्वास , आत्मीयता , सहनशक्ति तथा अभ्यास जैसे गुणो की आवश्यकता होती है तभी वह सफल उपचारक बन सकता है ।

Sunday, August 12, 2007

रेकी शक्तिपात

रेकी शक्तिपात को रेकी सुसंगता , दीक्षा , अभिषेक या Attunement भी कहते है । रेकी आचार्य अर्थात रेकी ग्रैंड मास्टर के सिद्ध हाथो के द्वारा दीं जाने शक्तिशाली ऊर्जा शक्तिपात कही जाती हैं । रेकी शक्तिपात हर कोर्स मे किया जता है । शक्तिपात के बाद विद्यार्थी सर्व व्यापी प्राणशक्ति के स्रोत से जुड़ जाता हैं । यह एक दैवीय शक्ति है जो चैनल के हाथो मे जीवन भर रहती है । शक्तिपात के द्वारा रेकी गुरू विद्यार्थी को ब्रह्मांडीय ऊर्जा शक्ति से जोड़ देता है और उसके जीवन का रूपांतरण हों जाता है। जो व्यक्ति जितना संवेदनशील होता है उतनी ही जल्दी वह दैवीय शक्ति से जुड़ जाता है । रेकी शक्तिपात दूरस्थ { distant Attunement } भी किया जाता है .

Friday, August 10, 2007

रेकी -- प्रत्येक कोर्स के बीच " कितना अंतर " आवश्यक है ?

प्रत्येक कोर्स के बीच " कितना अंतर " आवश्यक है ? यह अत्यंत समझदारी की बात है । डाक्टर ऊसुई नए हर कोर्स कै बीच २१ दिन का अन्तेर उचित माना है। कुछ रेकी ग्रैंड मास्टर इस नियम को नहीं मानते और वह अपनी सुविधा से अंतराल तय कर लेते हैं । जल्दी जल्दी कोर्स समाप्त करने से विद्यार्थी शारीरिक एवम मानसिक रूप से थक जाता है और एडवांस कोर्स की तरंगो को पूर्ण रूप से ग्रहण नहीं कर पाता । मेरा अनुभव है कि प्रत्येक कोर्स के बीच तीन दिन अभ्यास के लिये अवश्य देना चाहिये और "मास्टरशिप " करने से पहले रेकी उपचार के अनुभव भी होना चाहिये । अपना तथा दूसरो का उपचार करने पेर अधिक स्पर्श उर्जा का अनुभव होने लगता है और रेकी - उपचार के प्रति विश्वास भी बढ़ जाता है ।

Thursday, August 9, 2007

रेकी ग्रैंड मास्टरशिप

रेकी मास्टर बनाने की क्षमता प्रदान करने वाले आचार्य को रेकी ग्रैंड मास्टर कहा जाता है। रेकी ग्रैंड मास्टरशिप रेकी का उच्चतम कोर्स है । सैकड़ो - हजारो विद्यार्थी रेकी सीखते हैं परन्तु " रेकी ग्रैंड मास्टरशिप " की ऊचाई तक वे ही पहुचते है जो रेकी के अभ्यास , प्रचार एवम प्रसार मे पूरे उत्साह से लगाए रहते हैं । इस कोर्स मे शक्ति एवम उर्जा बढ़ाने वाले अनेक सिम्बल सिखाये जाते है । आज्ञा चक्र को खोलने वाला तथा विद्य , वैभव , प्रसन्नता, विजय , अभिव्यक्ति , पूर्णता , प्रेम , व ध्यान को बढ़ाने वाले अनके सिम्बल सिखाये जाते हैं । रेकी उर्जा को जल मे स्थापित करना { sui ching } सिखाया जाता हैं . शक्ति चक्र कि ग्रीक तथा अमेरिकन पद्धति सिखायी जाती हैं । त्राटक क्रिया द्वारा नेत्रो की चुम्बकीये शक्ति का विकास किया जाता हैं । मास्टर ग्रिड बनाना , सामुहिक उपचार करना , विद्या शक्तिपात तथा स्मृति शक्तिपात भी सिखाया जाता हैं । यह एक आध्यात्मिक साधना हैं जिसमे शांन्ति संतुलन एवम धेर्य्र का विकास होता है ओर रेकी ग्रैंड मास्टर बन कर प्राणिमात्र के प्रति कर्तव्य बोध अधिक बढ जाता है ।

Wednesday, August 8, 2007

रेकी तृतीय डिग्री { बी } कोर्स

रेकी तृतीय डिग्री { बी } कोर्स , रेकी मास्टर कोर्स कहलाता हैं । जिसे अनुभवी , साह्रदय , गुरू { रेकी ग्रैंड मास्टर } ही सिखा सकता है। अपने पुरवाग्रहो को छोड़ कर जो भी रेकी चैनल समर्पण , श्रद्धा , और विश्वास के साथ गुरू के पास जाता है वह " रेकी मास्टर " बन सकता है । शरीर एवम मन की शक्तियों को एकाग्र कर शक्तिपात { Attunement } के रहस्य समझाये जाते हैं । परम्परागत , आधुनिक , तिब्बेतन , भारतीय , डाक्टर उसुई तथा विश्व की प्रमुख रेकी संस्थाओ द्वारा मान्य शक्तिपात की विधियाँ सिखाई जाती है । मुलबंध का ज्ञान , अन्तः करण सिम्बल , रेकी उपचार शक्तिपात , दूरस्थ शक्तिपात, रेकी के सफल संचालन का ज्ञान दिया जाता है । रेकी मास्टर बन कर नाम , प्रतिष्ठा , धन , सुख , और स्वास्थ्य तथा शांति पायी जा सकती हैं ।

Thursday, August 2, 2007

रेकी तृतीय डिग्री { ए } कोर्स

रेकी तृतीय डिग्री { ए } कोर्स रेकी मास्टर उपचारक कोर्स है । इस कोर्स मे बहुत विस्तार से साइकिक सर्जरी सिखाई जाती है । रेकी साइकिक सर्जरी , लेज़र साइकिक सर्जरी तथा औरा साइकिक सर्जरी इसके प्रमुख भाग हैं । इस कोर्स मे स्फटिक उपचार विज्ञान की विस्तार से चर्चा की जाती है । स्फटिक { क्रिस्टल } की सही पहचान व उसके उपयोग सिखाये जाते हैं । इस कोर्स मे उद्देश्य प्राप्ति ध्यान , सिम्बल ध्यान , चक्र ध्यान , डाक्टर उसुई सिम्बल , आज्ञाचक्र , नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के उपाय सिखाये जाते है । यह बहुत ही प्रभावशाली कोर्स है । इस के द्वारा मानसिक एवम आद्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है । इसे सीख कर हर रोग एवम व्याधि का उपचार किया जा सकता है ।

Tuesday, July 31, 2007

रेकी द्वितीय डिग्री कोर्स

द्वितीय डिग्री कोर्स के शक्तिपात से { Attunement } रेकी तरंगो का प्रभाव व्यक्ति के चक्रो पर अधिक प्रभावशाली ढंग से पड़ता है । इस कोर्स मे रेकी के तीन सिम्बल { प्रतीक } सिखाये जाते हैं । इस कोर्स मे परामानासिक शक्तियों का परिचय दिया जाता हैं । यन्त्र , तंत्र , मन्त्र , पिरामिड यन्त्र , कुंडलिनी , पेंडुलम के लाभ बताये जाते हैं । रेकी शक्ति सिम्बल { Power symbol } के दारा सजीव या निर्जीव शक्ति बढ़ जाती है । गलत व्यक्ति , वस्तु या वातावरण की नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा बताई जाती हैं । मानसिक या भावनात्मक सिम्बल { mental and emotional symbol } से गलत आदतो से छुटकारा तथा एकाग्रता , स्मरणशक्ति , पारिवारिक संबंधो को सुधारने की कला सिखायी जाती है । खोई वस्तुए भी इस सिम्बल के ध्यान से मिल जाती हैं । दूर उपचारक सिम्बल { distant symbol } रेकी मे बहुत प्रभावशाली है । इसका उपयोग शक्ति , सुरक्षा , उपचार , शक्तिपात , भविष्य मे उन्नति तथा मनोकामना पूर्ति के लिये होता है ।
द्वितीय डिग्री कोर्स मे मस्तिशिक की मूलभूत तरंगो का परिचय तथा अल्फ़ा लेबल के उपयोग ओर ध्यान की विधियां बताई जाती हैं ।
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Friday, July 27, 2007

रेकी प्रथम डिग्री कोर्स

रेकी प्रथम डिग्री कोर्स - यह रेकी के सिद्वांत , इतिहास व लाभ , शक्तिपात द्वारा प्राणउर्जा का जागरण , शिथिलीकरण , अल्फ़ा लेबल , आभामण्ल { aura } , विविध रोगो के उपचार का ज्ञान , चक्र विज्ञान , मानसिक रेचक ध्यान , स्फटिक विज्ञान का परिचय , आहार एवम स्वास्थ्य का पूर्ण ज्ञान , जीवन के सही रूप से रूपांतरित करने वाले डाक्टर ऊसुई के सिद्धांत सिखाये जाते हैं ।
बेसिक कोर्स कर लेने पर व्यक्ति स्वयम का तथा दूसरो का उपचार करना सीख लेता हैं । बेसिक कोर्स सीखकर धरती कि सभी सजीव , निर्जीव , वस्तुये , पेड़ , पोधे , पशु , पेयजल , आहार आदि को स्वस्थ , संतुलित तथा ऊर्जावान बना सकता है ।

Monday, July 23, 2007

रेकी परिचय ३

' रे ' अर्थात सार्वभोमिक { युनिवर्सल } एवम ' की ' अर्थात प्राणशक्ति { लाइफ फोर्स एनेर्जी } वह जीवन शक्ति जो इश्वर प्रदत हे और हर जीवात्मा मे व्याप्त है । यह शक्ति हमारे हाथो मे होती है और इस शक्ति का जागरण किसी योग्य { रेकी ग्रैंड मास्टर } गुरू के शक्तिपात { initiation } द्वारा ही संभव होता है । तिब्बत एवम भारत मे इस शक्ति को पुनर्जीवित कराने वाले जापान के साधक डाक्टर मिकाओ ऊसुई माने जाते है । ऊसुई के योग्य शिष्य डाक्टर छुज़ीरो हयाशी ने इस विद्या को डिग्रीयों मे अर्थात कोर्स का विभाजन कर के इसे सीखना अधिक सुविधाजनक बना दिया हे । डाक्टर छुज़ीरो हयाशी की शिष्या मैडम हवायो टकाटा रेकी मे प्रथम महिला हें । जापान से बाहर रेकी को पंहुचा कर मैडम हवायो टकाटा ने मानवता का कल्याण किया है ।

Friday, July 20, 2007

रेकी परिचय २

रेकी वैज्ञानिक , प्रमाणिक , सरलतम , अचूक प्राण उपचार पध्दति है । केवल हाथो के स्पर्श से स्वयम के तथा दूसरो के शारीरिक तथा मानसिक रोगो का सफल उपचार किया जाता है । प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर इश्वर प्रदत अदभुत शक्ति छिपी होती है जिसका उपयोग रेकी - उपचार मे किया जाता है । संसार की किसी भी प्राणवान वस्तु , व्यक्ति , पेड़ , पोधे , जीव जंतु को स्पर्श { नजदीक या दूर } के द्वारा रोग मुक्त किया जाता है । रोग , दवाये , डाक्टर की फ़ीस से मुक्त , घर - घर मे हर व्यक्ति चिकित्सक बनकर आत्मनिर्भर हो सकता है और अपने परिवार मे सुख - शांति तथा स्वास्थ्य ला सकता है । बच्चे , बड़े - बूढ़े , शिक्षित , अशिक्षित कोई भी रेकी - विद्या को सीख सकता है ।

Thursday, July 19, 2007

रेकी परिचय १

रेकी शुद्ध प्राणशक्ति है । भगवान् बुद्ध एवम ईसा मसीह इस शक्ति का प्रयोग कर किसी व्यक्ति को निरोग कर देते थे परन्तु कालांतर मे ये पद्धति लुप्त हो गयी ।
" रे " से तात्पर्य आत्मा , प्रकाश , किरण या ब्रह्माण्ड की ऊर्जा है ।
" की " से तात्पर्य चीनी भाषा मे " ची " है । ईसाइयों के लिये यह ईसा का प्रकाश है । हिन्दुओ के लिये " प्राण " है । हवाई लोगो के लिये " मन " है । वीहेल्म मे " शारीरिक ऊर्जा " है । अंग्रेजी मे जीवन की श्वास या जैवीय ऊर्जा है ।
रेकी का सार है - स्वर्ग , पृथ्वी तथा मानवता का संतुलित रूप जिसकी खोज डाक्टर मिकाओ ऊसुई ने अथक परिश्रम तथा साधना द्वारा की है और जिसे उसुई शिकी रिहो [ USUI SHIKI RYOHO ] अर्थात प्राकृतिक उपचार की उसुई प्रणाली के नाम से जाना जाता है ।

Monday, July 9, 2007

रेकी सीखने के पश्चात् आप अपने को अपनी उर्जा से ठीक कर सकते है

आप भी रेकी हीलिंग सेंटर आकर या पत्राचार द्वारा रेकी सीख सकते हें
रेकी सीखने के पश्चात् आप अपने को अपनी उर्जा से ठीक कर सकते है


REIKI COURSES OFFERED
REIKI BASIC
REIKI ADVANCE
3 RD A MASTER IN HEALING
3 RD B MASTER IN TEACHING
GRANDMASTER
KARUNA REIKI 1ST 2ND AND MASTERSHIP
MUDRA GYAN
SUJOK THEORY
DOUSING

इसके अलावा आपको क्रिस्टल ज्ञान भी दिया जाता है

Distant Healing
के लिये आप फ़ोन , ईमेल अथवा कमेन्ट का प्रयोग करके हमसे बात कर सकते है
रेकी का प्रयोग मै किसी भी नेगेटिव काम के लिये नहीं करती हूँ अतः इस संबंध मे कोई मेल ना दे

Friday, July 6, 2007

LEARN REIKI AND HEAL YOUR SELF THRU YOUR TOUCH

You can learn the following by visiting Reiki Healing Center or thru correspondence course
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Lot of crystal are also available at the healing center for cure

Sunday, July 1, 2007

मेरा परिचय

Dr MANJULATA SINGH
MA. PhD (University Of Lucknow}

RESI B - 24 RAMPRASTH
P.O. CNANDER NAGAR
GHAZIABAD 201011
UP
PHONE 91 120 2627886 /4107886

OFF 78 REIKI HEALING CENTER
CITY CENTER MARKET RAMPRASTH
GHAZIABAD 201011 UP
PHONE 91 120 2627886 /4107886
Email drmanjulatasingh@rediffmail.com
Email drmanjulatasingh@gmail.com

Dr. Manjulata Singh, Retired as Reader from University of Delhi in the year 2000, after teaching Hindi for 42 years. 7 years teaching experience with Loreto College Lucknow & 35 years Teaching Experience with Daulat Ram College Delhi.
Her academic laurels include Gold Medal for M.A. from Lucknow University and PhD form the same university. She is member of various literary groups She has more than 200 articles published in various literary magazines and 7 published books in the field of poetry, criticism and fiction.
१. हिंदी उपन्यासो मे मध्यवर्ग
२. आस्था और अनुभूति
३. हिंदी कहानी मे युग बोध
४. अधूरे संबंध तथा अन्य कहानियाँ
५. महायात्रा
६. एकांत
७. भजन मंजूषा

She is receipient of the following honors
1.Bharti Ratan Saman From Anubhav Prakashan Sahibabad
2.Women Of the Year 2000 From American Biographical Institute
3.Best Reiki Grandmaster Award From Reiki Healing Foundation USA
4.PRESTIGIOUS LIFE TIME "OUTSTANDING CONTRIBUTION TO REIKI" AWARD. by Reiki Healing Foundation, New York USA Chapter for the year 2004, She was given this award On “Guru Purinma” for her services as a Reiki healer and Reiki teacher. She was considered for this award as she has healed more than 200 chronic patients and has taught more 150 people the principles of Reiki.

She does not charge money for healing and teaching REIKI to economically weaker section of society and her consultations are Free for Senior citizens. She is Founder of “Reiki Sparsh Tarang”, a group of talented and devoted Reiki Healers.
She and her group of Healers are constantly making people aware of REIKI where in ailments are cured not by medicine but by energy.